कोरोना ( Covid-19 ) का वैक्सीन कैसे काम करता है ? How does Corona Vaccine works? - in Hindi


                    इंडिया कोरोना की दूसरी लहर से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, और अगले कुछ महीनों में तीसरी लहर के चपेट में आने के अनुमान है। भारत सरकार के लिए बड़े पैमाने पर vaccination अभियान लागु करना चुनौतीपूर्ण है। दुनिया की कुल आबादी का १७.७ % ( १.३९ अरब ) हिस्सा भारत में है, और इसलिए देश में वैक्सीन का उत्पादन एक बड़ी चुनौती रहा है। तो चलिए इस पोस्ट में हमलोग जानते है की  भारत में vaccination की क्या स्तिथी है और कोरोना का वैक्सीन कैसे काम करता है।  

                    मार्च २०२१ तक नोवेल कोरोना वायरस बीमारी के लिए अधिकांश वैक्सीन चीन में निर्मित किये गए, उसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, युरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम का स्थान है। अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने सभी वैक्सीन घरेलु इस्तेमाल के लिए रख लिए है। और दूसरी तरफ युरोपियन संघ देश वैक्सीन आपस में शेयर कर रहे है। वर्तमान में चीन और इंडिया ही ऐसे देश है जो अपने लगभग आधे वैक्सीन दुसरे विकसित और अविकसित देशों में निर्यात कर रहे है।  

How does Corona Vaccine works - in Hindi

        इंडिया के पास ३ वैक्सीन है ;

  1. Covishield - सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित
  2. Covaxin - भारत बायोटेक 
  3.  Sputnik V - Gamaleya रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ Epidemiology और माइक्रोबायोलॉजी 
मई २०२१ तक भारत में प्रति महीना लगभग ७० मिलियन Covishield और १० मिलियन Covaxin डोस का निर्माण किया गया है। यह उत्पादन क्षमता भारत के विशाल जनसंख्या को कवर करने के लिए अपर्याप्त है , इसलिए निर्माताओं ने आने वाले महीनों में क्रमशः प्रति महीना १०० और ८० मिलियन डोसेस की प्रोडक्शन का विश्वास जताया है। 

चलिए एक नजर डालते है vaccination नंबर्स पर ;

Data taken on 26 Sept 2021 - data credit - Google 

कोरोना का वैक्सीन कैसे काम करता है यह जानने से पहले चलिए जानते है की हमारा शरीर किसी भी संक्रमण या वायरस के खिलाफ कैसे काम करता है। 

शरीर वायरस के खिलाफ कैसे प्रतिक्रिया करता है ?

वैक्सीन कैसे काम करता है यह जानने के लिए पहले जानते है की हमारा शरीर बिमारी से कैसे लड़ता है। विषाणु हमारे चारों और है, हमारे पर्यावरण में और हमारे शरीर दोनों में। जब कोई व्यक्ति अतिसंवेदनशील होता है और उनका सामना हानिकारक जीव से होता है, तो यह बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है। 

जब रोगाणु, जैसे बैक्टीरिया या वायरस, शरीर पर आक्रमण करते है, तो वे हमला करते है और बढ़ते रहते है। यह आक्रमण, जिसे संक्रमण कहा जाता है, वही बीमारी का कारण बन जाता है। इस संक्रमण से लड़ने के लिए हमारे शरीर की Immune सिस्टम कई उपकरणों का उपयोग करती है। हमारे शरीर में लाल Blood Cells होती है, जो ऑक्सीजन को tissues और अंगो तक ले जाती है और सफ़ेद Blood Cells संक्रमण से लड़ने के लिए होते है। इन सफ़ेद Blood Cells में मुख्य रूप से Macrophages, B-lymphocytes और T-lymphocytes होते है। 

पहली बार जब शरीर किसी रोगाणु का सामना करता है, तो संक्रमण को ख़त्म करने के लिए आवश्यक सभी रोगाणु विरोधी उपकरणों को बनाने और उनका उपयोग करने में कई दिन लग सकते है। संक्रमण के बाद, immune system को याद रहता है की उसने उस बीमारी के खिलाफ शरीर की रक्षा करने के तरीके के बारे में क्या सीखा। शरीर कुछ T-lymphocytes रखता है, जिन्हे मेमोरी सेल कहा जाता है, जो शरीर में फिर से उसी रोगाणु का सामना करने पर जल्दी से कार्य करते है। जब परिचित antigens का पता लगाया जाता है, तो B-lymphocytes उन पर हमला करने के लिये antibodies का उत्पादन करते हैं। 

वैक्सीन कैसे काम करता है ?

वैक्सीन संक्रमण की नकल करके immunity बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, इस प्रकार का संक्रमण लगभग कभी भी बीमारी का कारण नहीं बनता है, लेकिन यह immune system को T-lymphocytes और antibodies का उत्पादन करने का कारण बनता है। कभी कभी टीका लगवाने के बाद, नकली संक्रमण से बुखार जैसे मामुली लक्षण हो सकते हैं। इस तरह के मामूली लक्षण सामान्य हैं और इसकी उम्मीद की जानी चाहिए क्योंकि शरीर immunity बनाता हैं। 

एक बार नकली संक्रमण दूर हो जाने के बाद, शरीर में उससे बने B-lymphocytes और T-lymphocytes छोड़ दिए जाते हैं जो याद रखते है की भविष्य में उस बीमारी से कैसे लड़ना है। हालांकि, टीकाकरण के बाद शरीर को B-lymphocytes और T-lymphocytes का उत्पादन करने में आमतौर पर कुछ सप्ताह लगते हैं। इसलिए, यह संभव है की टीकाकरण से ठीक पहले या ठीक बाद में किसी बीमारी से संक्रमित व्यक्ति में लक्षण विकसित हो सकते है और उसे बीमारी हो सकती है, क्योंकी वैक्सीन के पास सुरक्षा प्रदान करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। 

कुछ लोगों का मानना है की स्वाभाविक रूप से प्राप्त इम्युनिटी, वैक्सीन द्वारा प्रदान की गयी इम्युनिटी से बेहतर है। हालांकि, प्राकृतिक संक्रमण गंभीर समस्या पैदा कर सकते है और घातक हो सकते हैं।  

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