History Of Indian Railways in Hindi - भारतीय रेल का इतिहास

भारतीय रेलवे, जिसकी शुरुआत १८५३ में हुई थी, तब से देश का एक अभिन्न अंग बना है। एक ऐसा नेटवर्क जिसने १३० करोड़ आबादी वाले देश को एक साथ रखा हुआ है। एक ऐसी स्व-चलित सामाजिक प्रणाली जो इस राष्ट्र की जीवन रेखा बन गयी है। भारतीय रेलवे एशिया में सबसे बड़ी रेल वेब है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रेल है। 
तो चलिए जानते है भारतीय रेल का इतिहास के बारे में - History Of Indian Railways in Hindi. 

History Of Indian Railways in Hindi

भारतीय रेलवे की शुरुआत 

भारत में रेलवे को पहली बार १८५३ में लाया गया था। वैसे तो भारत में रेल प्रणाली के लिए एक योजना पहली बार १८३२ में सामने आयी थी, लेकिन एक दशक से अधिक समय तक इसके लिए कोई कदम नहीं उठाये गए। १८४४ में, भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग ने निजी उद्यमियों को भारत में एक रेल प्रणाली को स्थापित करने की अनुमति दी। दो नई रेलवे कंपनियां बनाई गयी और ईस्ट इंडिया कंपनी को उनकी सहायता करने के लिए कहा गया। भारत में पहली ट्रेन २२ दिसंबर १८५१ को चालू हुई और इसका इस्तेमाल रूडकी में निर्माण सामग्री के उपयोग के लिए किया गया। एक डेढ़ साल बाद १६ अप्रैल १८५३ को, बोरीबंदर, बॉम्बे और थाना के बीच पहली यात्री ट्रैन सेवा का उद्घाटन किया गया। ३४ किमी ( २१ मील ) की दुरी तय करते हुए इसे तीन इंजनों, साहिब, सिंध और सुल्तान द्वारा संचालित किया गया था। यह भारत में रेलवे का औपचारिक जन्म था। 

ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे द्वारा संचालित और तीन स्टीम इंजन द्वारा भारत की पहली यात्री ट्रैन, १६७६ मिमी ( ५ फिट ६ इंच ) चौड़ी ट्रैक पर १४ डिब्बों और ४०० लोगों के साथ चली। ठाणे पुल भारत का पहला रेलवे पुल था, जिसे १८५४ में ठाणे के नाले के ऊपर बनाया गया था जब मुंबई-ठाणे लाइन को कल्याण तक बढ़ाया गया था। पूर्वी भारत की पहली यात्री ट्रैन १५ अगस्त १८५४ को ३९ किमी दूर हावड़ा से हुगली तक चली। दक्षिण भारत में पहली यात्री ट्रैन १ जुलाई १८५६ को रोयापुरम-वयसरापड़ी ( मद्रास ) से वल्लाजाह रोड ( अरकोट ) तक ९७ किमी चली।  


१८७९ में, निजाम के Guaranteed State Railway की स्थापना की गई, जिसने तत्कालीन हैदराबाद राज्य में काचीगुडा रेलवे स्टेशन के साथ कई रेलवे लाइनों का निर्माण किया, जो इसका मुख्यालय था। १८९७ में कई रेलवे कंपनियों द्वारा यात्री डिब्बों में प्रकाश व्यवस्था शुरू की गयी थीं। ३ फरवरी १९२५ को भारत में पहली इलेक्ट्रिक पैसंजर ट्रैन विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला के बिच चली। 

Regional Zones में भारतीय रेलवे का संगठन १९५१ में शुरू हुआ, जब दक्षिण, मध्य और पश्चिम zones बनाये गए। १९५१ में सभी यात्री वर्गों में सभी डिब्बों के लिए पंखे और रोशनी अनिवार्य किये गए थे और डिब्बों में सोने की जगह दी गयी थी। १९५६ में हावड़ा और दिल्ली के बिच पहली पूरी तरह से वातानुकूलित ट्रैन शुरू की गयी थी। दस साल बाद मुंबई और अहमदाबाद के बिच पहली कंटेनर वाली माल गाड़ी सेवा शुरू हुई। 

भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण 

१९८६ में कम्प्यूटर द्वारा टिकट और आरक्षण सेवा नई दिल्ली में शुरू किये गए थे। १९८८ में पहली शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली और झांसी के बिच शुरू की गयी थी, बाद में इसे भोपाल तक बढ़ा दिया गया। दो साल बाद नई दिल्ली में पहली सेल्फ-प्रिंटिंग टिकट मशीन ( SPTM ) शुरू की गयी। १९९३ में भारतीय रेलवे में वातानुकूलित त्रि-स्तरीय कोच और एक स्लीपर क्लास ( द्वितीय श्रेणी से अलग ) शुरू की गयी थी। 

कम्प्यूटर द्वारा आरक्षण की CONCERT प्रणाली सितंबर १९९६ में नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में तैनात की गयी थी। १९९८ में, मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में कूपन मान्य करने वाली मशीने ( CVM ) शुरू की गयी। १८ अप्रैल १९९९ को राष्ट्रव्यापी concierge प्रणाली का संचालन शुरू हुआ। फरवरी २००० में भारतीय रेलवे की वेबसाइट ऑनलाइन हो गई। ३ अगस्त २००२ को, भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन ट्रैन आरक्षण और टिकटिंग शुरू की। रेल बजट आमतौर पर २०१६ तक हर साल केंद्रीय बजट से दो दिन पहले पेश किया जाता था। केंद्र सरकार ने अगले साल से रेल और जनरल बजट के मर्जर को मंजूरी दे दी, जिससे देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर के लिए अलग बजट की ९२ साल पुरानी प्रक्टिस समाप्त हो गयी। ३१ मार्च २०१७ को भारतीय रेलवे ने घोषणा की कि देश का पूरा रेल नेटवर्क २०२२ या २०२३ तक विद्युतीकृत ( electrified ) हो जाएगा। 

भारतीय रेलवे के इंजन 

१९८५ से स्टीम इंजन को चरणबद्ध किया गया और इलेक्ट्रिक और डीज़ल इंजनों के साथ-साथ कुछ CNG इंजनों का उपयोग किया जाता है। स्टीम इंजनों का उपयोग केवल हेरिटेज ट्रेनों में किया जाता है। भारत में इंजनों को उनके गेज, motive power, जिस काम के लिए वे उपयुक्त है और उनकी शक्ती या मॉडेल नंबर द्वारा वर्गीकृत किया जाता है। उनके चार या पांच अक्षर वर्ग के नाम में यह जानकारी शामिल होती है। पहला अक्षर ट्रैक गेज, दूसरा उनका motive power ( डीज़ल या इलेक्ट्रिक ), और तीसरा उनका उपयुक्त यातायात ( माल, यात्री, बहु या शंटिंग ) दर्शाता है। चौथे अक्षर ने इंजन के chronological मॉडल नंबर को दर्शाया, लेकिन २००२ में एक नया वर्गीकरण अपनाया गया जिसमे नए डीज़ल इंजनों में चौथे अक्षर में हॉर्सपॉवर रेंज का संकेत मिलता है। 

इंजन के नाम में एक पांचवा अक्षर हो सकता है जो एक तकनीकी प्रकार, उपवर्ग या उप-प्रकार को दर्शाता है। नए डीज़ल इंजन वर्गीकरण में पाँचवा अक्षर हॉर्सपॉवर को दर्शाता है, जैसे की १०० HP के लिए A, २०० HP के लिए B, ३०० HP के लिए C और इसी तरह। इस वर्गीकरण में, WDM-3A मतलब ३१०० HP, WDM-3D मतलब ३४०० HP और WDM-3F मतलब ३६०० HP इंजन है। डीज़ल इंजनों को सहायक बिजली यूनिट्स के साथ लगाया जाता है, जो निष्क्रिय समय के दौरान लगभग ८८ प्रतिशत ईंधन की बचत करता है जब कोई ट्रैन नहीं चलती है। 

भारतीय रेलवे की कुछ रोचक बातें 

  • भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त रेल नेटवर्क में से एक है, जो छह बिलियन से अधिक यात्रियों और लगभग ७५० मिलियन टन माल का परिवहन करता है। 
  • भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा commercial या utility employer है, जिसमे १.६ मिलियन से अधिक कर्मचारी है। 
  • भारत में रेलवे मार्गों की कुल लंबाई ६३,९४० किमी ( ३९,२३० मील ) है। २००५ के अनुसार रेलवे के पास कुल २१६,७१७ डिब्बे, ३९,९३६ कोच और ७,३३९ इंजन है और कुल १४,२४४ रेलगाड़ियां चलती है, जिनमे लगभग ८००२ यात्री ट्रेनें शामिल है। 
  • मुंबई की उपनगरीय ट्रेनें जिसे लोकल ट्रैन कहा जाता है, भारत में किसी भी अन्य उपनगरीय नेटवर्क से अधिक भीड़ को संभालती है। इस नेटवर्क में तीन लाइनें है, पश्चिम, मध्य और हार्बर। इसे मुंबई की लाइफलाइन माना जाता है। 
  • The Palace On Wheels एक विशेष रूप से डिज़ाइन की गयी ट्रैन है जो स्टीम इंजन से चलती है, जिसे राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। 
  • लाइफलाइन एक्सप्रेस एक विशेष ट्रैन है जिसे "Hospital-On-Wheels" के रूप में जाना जाता है जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है। 
  • भारत में रेलवे के कुल ६८५३ स्टेशन है, ३०० यार्ड्स, २३०० माल-शेड और ७०० ट्रैन रिपेयर शॉप्स है। 
  • भारतीय रेलवे नेटवर्क पर दुरी और समय के मामले में कन्याकुमारी और जम्मू तवी के बिच स्थित हिमसागर एक्सप्रेस सबसे लम्बी चलने वाली ट्रैन है। यह लगभग ७४ घंटे और ५५ मिनट में ३७४५ किमी (२३२७ मील ) की दुरी तय करती है। 
  • १८६२ में बिहार के मुंगेर के पास जमालपुर में पहली रेलवे वर्कशॉप स्थापित की गयी थी। 
  • नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ने दुनिया के सबसे बड़े रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम के लिए गिनीज बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया है। 
  • भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग २.५ करोड़ यात्रियों का परिवहन करती है। 
  • गोरखपुर रेलवे स्टेशन में दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफार्म है जिसकी लंबाई १३६६.३३ मीटर है। 
  • छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को भारत का सबसे खूबसूरत ट्रैन स्टेशन माना जाता है। 
  • महाराजा एक्सप्रेस भारत की सबसे महंगी luxury ट्रैन है। 
  • IRCTC की वेबसाइट पर प्रति मिनट १२ लाख के करीब हिट्स मिलते है। 
  • भारतीय रेलवे ने लगभग ५० साल पुरे करने के बाद ट्रेनों को शौचालय दिया। 

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